कब्ज का इलाज
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कब्ज (Constipation)
3.
१. बेल पाउडर एक-एक चम्मच सुबह शाम खाने के
बाद खाएं |
या
4.
2. रात में चुकंदर
(बीट) की सब्जी खाएं |
या
5.
3. रात में दूध में
8-10 मुनक्का डालकर उबालें और बीज निकाल कर खा लें |
या
चिकित्सा -
१) सुबह उठकर दो ग्लास तांबे के बर्तन में रखा पानी पियें ।
२) रात में अजवाईन (आधी चम्मच) गुड के साथ खायें और ऊपर से गुनगुना दूध पी लें ।
या
३) त्रिफला चूर्ण एक चम्मच रात में गुनगुने पानी के साथ सोने से पहले लें ।
या
४) एरण्ड तेल
में २-४
काली छोटी हरड
सेककर सुबह खाली
पेट खायें ।
या
५) दही के ऊपर का तैरता हुआ पानी सुबह पियें ।
पथ्य :-
१) पपीता या
पत्तागोभी की सब्जी का
प्रयोग करें ।
२) अरहर और मूंग की दाल का सेवन करें ।
३) टिण्डा, तोरइ का प्रयोग, दोपहर के भोजन के बाद छाछ पियें ।
२) अरहर और मूंग की दाल का सेवन करें ।
३) टिण्डा, तोरइ का प्रयोग, दोपहर के भोजन के बाद छाछ पियें ।
४) शाम को
चावल और मूंग
की सादी खिचड़ी
देशी गाय का
घी मिलाकर खायें
।
५) गाजर, मूली, टमाटर, ककड़ी, सलाद का प्रयोग अधिक करें ।
६) दूध मे गुलकन्द मिलाकर ले ।
७) भोजन के बाद वज्रासन में 10 मिनट अवश्य बैठे !
५) गाजर, मूली, टमाटर, ककड़ी, सलाद का प्रयोग अधिक करें ।
६) दूध मे गुलकन्द मिलाकर ले ।
७) भोजन के बाद वज्रासन में 10 मिनट अवश्य बैठे !
जौ, मोटा अनाज, पुराना चावल, मूली, खीरा, पपीता, टिण्डा, तोरर्इ,
गर्म पानी पीना, पानी अधिक पीना ।
अपथ्य :- मल का वेग रोकना, फ्रिज का ठण्डा पानी, मसालेदार भोजन, सभी ठण्डी चीजें, केला, चावल, आलू, कंद, सभी बासी और मैदे के सामान, पिठ्ठी के पदार्थ (जैसे - कचौड़ी, बड़े आदि) !
अपथ्य :- मल का वेग रोकना, फ्रिज का ठण्डा पानी, मसालेदार भोजन, सभी ठण्डी चीजें, केला, चावल, आलू, कंद, सभी बासी और मैदे के सामान, पिठ्ठी के पदार्थ (जैसे - कचौड़ी, बड़े आदि) !
रोग मुक्ति के लिये आवश्यक
नियम :
पानी के सामान्य नियम
:
१) सुबह बिना मंजन/कुल्ला
किये दो गिलास गुनगुना पानी पिएं ।
२) पानी हमेशा बैठकर घूँट-घूँट
कर के पियें ।
३) भोजन करते समय एक घूँट
से अधिक पानी कदापि ना पियें, भोजन समाप्त होने के डेढ़ घण्टे बाद पानी अवश्य पियें
।
४) पानी हमेशा गुनगुना या
सादा ही पियें (ठंडा पानी का प्रयोग कभी भी ना करें।
भोजन के सामान्य नियम
:
१) सूर्योदय के दो घंटे
के अंदर सुबह का भोजन और सूर्यास्त के एक घंटे पहले का भोजन अवश्य कर लें ।
२) यदि दोपहर को भूख लगे
तो १२ से २ बीच में अल्पाहार कर लें, उदाहरण - मूंग की खिचड़ी, सलाद, फल और छांछ ।
३) सुबह दही व फल दोपहर
को छांछ और सूर्यास्त के पश्चात दूध हितकर है ।
४) भोजन अच्छी तरह चबाकर
खाएं और दिन में ३ बार से अधिक ना खाएं ।
अन्य आवश्यक नियम
:
१) मिट्टी के बर्तन/हांडी
मे बनाया भोजन स्वस्थ्य के लिये सर्वश्रेष्ठ है ।
२) किसी भी प्रकार का रिफाइंड
तेल और सोयाबीन, कपास, सूर्यमुखी, पाम, राईस ब्रॉन और वनस्पति घी का प्रयोग विषतुल्य
है । उसके स्थान पर मूंगफली, तिल, सरसो व नारियल के घानी वाले तेल का ही प्रयोग करें
।
३) चीनी/शक्कर का प्रयोग
ना करें, उसके स्थान पर गुड़ या धागे वाली मिश्री (खड़ी शक्कर) का प्रयोग करें ।
४) आयोडीन युक्त नमक से
नपुंसकता होती है इसलिए उसके स्थान पर सेंधा नमक या ढेले वाले नमक प्रयोग करें ।
५) मैदे का प्रयोग शरीर
के लिये हानिकारक है इसलिए इसका प्रयोग ना करें ।
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